Uttarakhand SIR

वोटर लिस्ट का बड़ा सर्वे शुरू! उत्तराखंड में प्री SIR के तहत BLO की एंट्री, जानिए किसे नहीं देने होंगे कागज…

Uttarakhand SIR : उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारी तेज, हर वोटर तक पहुंचने का मिशन शुरू

Uttarakhand SIR

उत्तराखंड में SIR (Special Intensive Revision) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की उलटी गिनती शुरू होती दिख रही है। देशभर में मतदाता सूची को दुरुस्त और अपडेट रखने के लिए चल रहे इस व्यापक कार्यक्रम की आहट अब पहाड़ी राज्य में भी सुनाई देने लगी है। भारत के चुनाव तंत्र को मजबूत बनाने की यह कवायद सीधे आम वोटर के घर तक पहुंचने वाली है, क्योंकि बूथ स्तर के अधिकारी अब फाइलों से निकलकर दरवाजे तक दस्तक दे रहे हैं।

यह पूरा कार्यक्रम भारत निर्वाचन आयोग के मार्गदर्शन में चल रहा है। आयोग ने पहले चरण में बिहार और दूसरे चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR लागू किया है। इन्हीं तैयारियों के बीच उत्तराखंड में “प्री-एसआईआर” गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। इसका साफ संदेश है कि राज्य में जल्द ही विशेष गहन पुनरीक्षण की औपचारिक शुरुआत हो सकती है।


SIR क्या है और क्यों है जरूरी?

SIR का मकसद सरल है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा है। यह एक विशेष अभियान होता है, जिसके तहत राज्य की पूरी मतदाता सूची का दोबारा गहन सत्यापन किया जाता है। इसमें यह जांच की जाती है कि:

  • कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में तो नहीं है
  • किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा तो नहीं है
  • पता, उम्र या नाम जैसी जानकारियों में कोई गलती तो नहीं है
  • मृत या स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों के नाम सूची में तो नहीं हैं

पिछली बार उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था। तब राज्य नया-नया बना था और मतदाता सूची की आधारशिला उसी वक्त रखी गई थी। अब 2025 आते-आते राज्य को बने 25 साल हो चुके हैं। इतने लंबे समय में जनसंख्या भी बदली, पलायन भी हुआ और नए वोटर भी जुड़े। ऐसे में एक बार फिर पूरी सूची को नए सिरे से जांचने की जरूरत महसूस की जा रही है।


प्री-एसआईआर शुरू: मैदान में उतरे बीएलओ

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने प्री-एसआईआर की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस चरण में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना कम से कम 30 मतदाताओं से संपर्क करें।

इसका उद्देश्य है:

  • वर्ष 2003 और वर्ष 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान
  • उन लोगों की पहचान करना जिनका नाम दोनों सूचियों में है
  • ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार करना जिन्हें एसआईआर के दौरान दस्तावेज नहीं देना होगा

यह काम पूरी तरह डिजिटल तरीके से हो रहा है। BLO मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एंट्री कर रहे हैं ताकि SIR के दौरान कागजी काम कम हो और गति ज्यादा रहे।


uttarakhand sir : eci update

2003 और 2025 की सूची में दोनों जगह नाम? तो डॉक्यूमेंट नहीं लगेगा

सरल शब्दों में कहें तो अगर किसी मतदाता का नाम वर्ष 2003 की सूची में भी है और 2025 की सूची में भी, तो उससे कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।

इसका फायदा दोहरा है:

  • आम जनता को बार-बार प्रमाणपत्र नहीं दिखाना पड़ेगा
  • चुनाव अधिकारी का समय बचेगा, जिससे प्रक्रिया तेज होगी

अधिकारियों का अनुमान है कि राज्य के करीब 60 से 70 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में आ सकते हैं। यानी बहुमत को SIR के दौरान किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं पड़ेगी।


40 साल से अधिक उम्र वालों की स्पेशल मैपिंग

प्री-एसआईआर चरण में उन मतदाताओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है जिनकी उम्र 40 साल या उससे अधिक है। ऐसे मतदाताओं के लिए दो तरीके अपनाए जा रहे हैं:

  1. अगर नाम 2003 की सूची में है -> सीधे मैपिंग
  2. अगर नाम नहीं है -> माता-पिता या दादा-दादी के आधार पर “प्रोजनी मैपिंग”

यानी परिवार के पुराने रिकॉर्ड को देखकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि व्यक्ति वास्तव में पात्र है और उसका नाम सही तरीके से जोड़ा जाए।


हर जिले में हेल्प डेस्क, वेबसाइट पर भी मिलेगी सूची

मतदाताओं को भटकना न पड़े, इसके लिए हर जिले में हेल्प डेस्क बनाई जा रही है। यहां लोग:

  • अपना नाम चेक कर सकते हैं
  • त्रुटि की शिकायत दर्ज करा सकते हैं
  • बदलाव की प्रक्रिया समझ सकते हैं

2003 की मतदाता सूची दो वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है:

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, वोटर को किसी भी हाल में परेशान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि “SIR शुरू होने से पहले हर नागरिक के पास अपनी जानकारी दुरुस्त कराने का पूरा अवसर होगा।”


उत्तराखंड में 11 हजार से ज्यादा बूथ, लेकिन BLA कम

उत्तराखंड में कुल 11,733 मतदान केंद्र हैं। इन पर राजनीतिक दलों की ओर से बूथ लेवल एजेंट यानी BLA नियुक्त किए जाते हैं, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

लेकिन अभी स्थिति यह है कि:

  • कुल बीएलए नियुक्त: 4,155
  • एक पार्टी से: 2,836
  • दूसरी पार्टी से: 1,259
  • तीसरी पार्टी से: 60

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने माना कि यह संख्या जरूरत से काफी कम है। उन्होंने बताया कि सभी राजनीतिक दलों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वे जल्द से जल्द अपने बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करें।


5 दिसंबर को राजनीतिक दलों के साथ बड़ी बैठक

मुख्य निर्वाचन कार्यालय अब राजनीतिक दलों के साथ सीधे संवाद के मोड में आ चुका है। 5 दिसंबर को राज्य स्तर पर एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें:

  • बीएलए नियुक्ति पर चर्चा
  • एसआईआर के दौरान सहयोग की रणनीति
  • मतदाता सूची पर आपत्तियों की प्रक्रिया
  • ग्राउंड लेवल समस्याओं के समाधान

जोगदंडे के मुताबिक, जब बीएलए मौके पर मौजूद रहते हैं तो छोटी-छोटी शिकायतें उसी समय सुलझ जाती हैं। इससे चुनाव कार्यालय पर बोझ भी कम पड़ता है।


किन मतदाताओं से नहीं लिए जाएंगे डॉक्यूमेंट?

SIR के दौरान नीचे दी गई श्रेणियों के लोगों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा:

  • जिनका नाम 2003 और 2025 दोनों सूची में है
  • जिनके परिवार का रिकॉर्ड 2003 की सूची में मौजूद है
  • जिनकी पहचान पहले से डिजिटल रिकॉर्ड में सत्यापित है

ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से पहले यह पूरी सूची बीएलए के साथ साझा की जाएगी, ताकि राजनीतिक दल भी जांच कर सकें। अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद भी:

  • नाम जोड़ा जा सकता है
  • नाम हटाया जा सकता है
  • पता सुधारा जा सकता है
  • नाम की स्पेलिंग ठीक की जा सकती है

नेपाल और भूटान से जुड़े मामलों पर साफ निर्देश

उत्तराखंड में नेपाल और भूटान के हजारों लोग रहते हैं जिनकी शादी भारत में हुई है। ऐसे मामलों पर भी प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है:

  • अगर भारतीय नागरिकता ले ली है -> वोटर लिस्ट में नाम जोड़ा जा सकता है
  • अगर नागरिकता नहीं ली -> पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी

यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा, फिर चाहे व्यक्ति कहीं से भी आया हो।


अभी डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं

इस समय जो अभियान चल रहा है, वह सिर्फ “प्री-एसआईआर” है। इसका मतलब:

  • अभी किसी को डॉक्यूमेंट जमा नहीं करना है
  • BLO सिर्फ यह जांच रहे हैं कि वोटर मौजूद हैं या नहीं
  • कोई फॉर्म नहीं भरवाया जा रहा है
  • केवल बेसिक जानकारी जुटाई जा रही है

अधिकारियों का कहना है कि जब SIR की औपचारिक अधिसूचना जारी होगी, तब ही दस्तावेजों की मांग की जाएगी।


Uttarakhand SIR का असली मतलब: मजबूत लोकतंत्र

इस पूरे अभियान का असली उद्देश्य केवल नाम जांचना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। एक साफ-सुथरी मतदाता सूची का मतलब है:

  • फर्जी वोटिंग पर रोक
  • सही प्रतिनिधि का चुनाव
  • वोटर का भरोसा बढ़ना
  • चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता

उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां पलायन और शहरीकरण बड़ी चुनौती हैं, वहां मतदाता सूची का अपडेट रहना बेहद जरूरी है।


आगे क्या?

आने वाले हफ्तों में:

  • SIR की फॉर्मल घोषणा
  • दस्तावेजों की सूची जारी
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन सुधार प्रक्रिया
  • विशेष कैंप और शिविर

की शुरुआत हो सकती है।


निष्कर्ष

Uttarakhand SIR केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर आम नागरिक के लोकतांत्रिक हक से जुड़ा कदम है। अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में सही है, तो आपकी आवाज सही जगह पहुंचेगी। और अगर नहीं है, तो यह अभियान आपको मौका देगा उसे दुरुस्त कराने का।

अब सबसे जरूरी बात यह है कि आप जागरूक रहें, BLO से सहयोग करें और समय रहते अपनी जानकारी जांच लें। यही मजबूत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है।


✅ FAQ Section

Q. उत्तराखंड में SIR कब शुरू होगा?

उत्तर: अभी राज्य में Pre-SIR चरण चल रहा है। SIR की औपचारिक अधिसूचना जल्द जारी होने की संभावना है, जिसके बाद प्रक्रिया पूरे राज्य में शुरू होगी।


Q. Pre-SIR और SIR में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • Pre-SIR: सिर्फ डेटा मिलान और प्राथमिक जांच
  • SIR: दस्तावेजों के आधार पर अंतिम सत्यापन और सूची अपडेट

Q. किन मतदाताओं से दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे?

उत्तर:

  • जिनका नाम 2003 और 2025 की सूची में है
  • जिनका रिकॉर्ड पहले से डिजिटल रूप से सत्यापित है
  • जिनका पारिवारिक विवरण 2003 की सूची में उपलब्ध है

Q. अगर किसी मतदाता का नाम 2003 सूची में नहीं है तो क्या होगा?

उत्तर: ऐसे मामलों में माता-पिता या दादा-दादी के रिकॉर्ड के आधार पर पहचान की जाएगी, जिसे Proceny Mapping कहा जाता है।


Q. BLO घर पर क्यों आ रहा है?

उत्तर: BLO मतदाता की मौजूदगी, पता और बुनियादी जानकारी की जांच कर रहा है ताकि SIR के समय गड़बड़ी न हो।


Q. उत्तराखंड में कितने मतदान केंद्र हैं?

उत्तर: राज्य में कुल 11,733 बूथ हैं, जहां SIR प्रक्रिया लागू होगी।


Q. Booth Level Agent (BLA) कौन होता है?

उत्तर: BLA राजनीतिक पार्टियों द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि होते हैं, जो मतदाता सूची पर निगरानी रखते हैं और आपत्तियों को उठाते हैं।


Q. अगर वोटर लिस्ट में नाम गलत है तो क्या करें?

उत्तर:

  • अपने जिले की Help Desk पर संपर्क करें
  • CEO की वेबसाइट पर जाकर जानकारी जांचें
  • BLO को सूचना दें

वेबसाइट:

  • ceo.uk.gov.in
  • voters.eci.gov.in

Q. क्या वोटर लिस्ट में ऑनलाइन सुधार हो सकता है?

उत्तर: जी हां। SIR शुरू होने के बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सुधार की सुविधा दी जाएगी।


Q. अगर BLO घर नहीं आया तो क्या करें?

उत्तर: अपने नजदीकी निर्वाचन कार्यालय या हेल्प डेस्क से संपर्क करें और शिकायत दर्ज कराएं।


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