UKSSSC PAPER LEAK

UKSSSC पेपर लीक पर सड़कों पर उतरे हजारों युवा , पेपर चोर गद्दी छोड़ के लगे नारे ! सीबीआई जांच की भी उठी मांग…

UKSSSC पेपर लीक विवाद: युवाओं का गुस्सा और सीबीआई जांच की मांग

देहारादून : उत्तराखंड में UKSSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में आयोजित हुई UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर ने प्रदेशभर के युवाओं को हिलाकर रख दिया है। यह मामला अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य और विश्वास से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया है। राजधानी देहरादून में इस पेपर लीक प्रकरण के खिलाफ बेरोजगार युवाओं का बड़ा आंदोलन देखने को मिला।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर UKSSSC (Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission) की कार्यप्रणाली और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों युवाओं ने देहरादून परेड मैदान में एकजुट होकर सरकार से सीबीआई जांच की मांग की और जमकर नारेबाजी की।

UKSSSC EXAM LEAK PROTEST

युवाओं का गुस्सा और आंदोलन

रविवार को आयोजित हुई UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा के कुछ ही मिनट बाद पेपर का सेट बाहर आना शुरू हो गया। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर पेपर वायरल होने के बाद परीक्षार्थियों में गुस्सा फैल गया। अगले ही दिन सैकड़ों की संख्या में युवा देहरादून पहुंचे और परेड मैदान में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

युवाओं ने बेरोजगार संघ के बैनर तले “पेपर चोर गद्दी छोड़” जैसे नारे लगाते हुए आक्रोश जाहिर किया। उनका कहना था कि यह केवल परीक्षा लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य और मेहनत के साथ विश्वासघात है। बेरोजगार युवाओं ने सचिवालय कूच करने का ऐलान भी किया था, लेकिन प्रशासन द्वारा धारा 163 लागू करने और सुरक्षा बढ़ाने के चलते वे परेड ग्राउंड के पास ही धरने पर बैठ गए।

UKSSSC EXAM PROTEST DEHRADUN

प्रशासन का पक्ष

पेपर लीक विवाद के बाद UKSSSC अध्यक्ष जी.एस. मर्तोलिया और एसएसपी अजय सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की गई थी और किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई। अधिकारियों का दावा है कि परीक्षा केंद्रों पर सख्त निगरानी रखी गई और हर संभव एहतियात बरता गया।

लेकिन युवाओं का कहना है कि यदि सब कुछ पारदर्शी था तो फिर परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद पेपर बाहर कैसे आया? इसी सवाल ने प्रशासन की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

बॉबी पंवार के आरोप

उत्तराखंड बेरोजगार संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार ने इस प्रकरण पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि “पेपर का सेट परीक्षा शुरू होने से पहले ही लीक हो गया था। सुबह 10 बजे दो युवकों को परीक्षा केंद्र के पीछे पेपर हल करते देखा गया, जिसके प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद हैं।”

बॉबी पंवार ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन और कुछ सफेदपोश लोग नकल माफियाओं से मिले हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक सीबीआई जांच नहीं होगी, तब तक इस पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को जारी रखें ताकि उनकी आवाज दबाई न जा सके।

अभ्यर्थियों की भावनाएं

पेपर लीक से सबसे ज्यादा प्रभावित वे अभ्यर्थी हुए हैं जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके इस परीक्षा की तैयारी की थी। नैनबाग से आए अमन नामक अभ्यर्थी ने कहा – “मैंने पटेलनगर में किराए का कमरा लेकर महीनों तैयारी की थी। यह मेरा आखिरी प्रयास था। लेकिन जब परीक्षा शुरू होने के तुरंत बाद पेपर बाहर आने की खबर मिली, तो मैं पूरी तरह टूट गया। अब मैं अपने जैसे बाकी बेरोजगार युवाओं के साथ प्रदर्शन में शामिल हूं ताकि न्याय मिल सके।”

अमन जैसे हजारों अभ्यर्थियों की कहानी इस आंदोलन का केंद्र है। उनका दर्द साफ दिख रहा है कि यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके भविष्य और आत्मसम्मान से जुड़ा मामला है।

STUDENT PROTEST AGAINST UKSSSC

पुलिस की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था

बेरोजगार युवाओं के आक्रोश को देखते हुए दून शहर में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी। धारा 163 लागू करके सचिवालय कूच की योजना को रोक दिया गया। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

हालांकि पुलिस की सख्ती के बावजूद आंदोलनकारी युवा शांतिपूर्ण ढंग से परेड ग्राउंड के पास धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

UKSSSC पर सवाल और युवाओं की मांग

यह पहली बार नहीं है जब UKSSSC पर पेपर लीक और धांधली के आरोप लगे हों। इससे पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठ चुके हैं। युवाओं का कहना है कि जब तक पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया नहीं होगी, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

उनकी सबसे बड़ी मांग है कि इस मामले की सीबीआई जांच हो ताकि नकल माफियाओं और उनकी मदद करने वाले अधिकारियों की असलियत सामने आ सके। साथ ही, वे चाहते हैं कि आने वाले समय में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं।

निष्कर्ष

UKSSSC पेपर लीक विवाद ने एक बार फिर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की नाराजगी को सामने ला दिया है। परीक्षा की पारदर्शिता पर उठे सवालों ने न केवल अभ्यर्थियों के विश्वास को तोड़ा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

युवाओं का यह आंदोलन केवल नौकरी पाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान और मेहनत की कद्र के लिए है। अगर समय रहते इस मुद्दे पर कठोर और पारदर्शी कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा प्रशासन और व्यवस्था से पूरी तरह उठ सकता है।


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