नन्ही देवी हत्याकांड में दो गिरफ्तार , जाने क्या थी हत्या की वजह..

Pilibhit nanhi devi muder case

👉 Pilibhit में दर्दनाक वारदात पारिवारिक शक बना हत्या की वजह,

Pilibhit से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पारिवारिक संदेह ने एक महिला की जान ले ली। जल्लूपुर गांव की निवासी 35 वर्षीय नन्हीं देवी की हत्या उसके ही पति और देवर ने मिलकर कर दी।

📌 मुख्य बिंदु:

  • नन्हीं देवी की शादी 20 साल पहले अखिलेश मिश्रा से हुई थी
  • पति ट्रक चालक था, घर पर कम रहता था
  • बेटियों के अचानक घर से गायब हो जाने पर शक गहराया
  • 3 जून को मायके जाते समय रास्ते में हत्या
  • डूंडा पुल से पति और देवर गिरफ्तार
  • खेत में छिपाकर रखे गए हथियार भी बरामद

📖Pilibhit घटना का पूरा विवरण

Pilibhit बरखेड़ा थाना क्षेत्र के पतरसिया गांव की मूल निवासी नन्हीं देवी अपने मायके जा रही थी, जब रास्ते में जल्लूपुर निवासी उसके पति अखिलेश मिश्रा और देवर अरविंद मिश्रा ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि दोनों ने बांके से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे मौके पर ही नन्हीं देवी की मौत हो गई।

🚓 गिरफ्तारी और खुलासे

पुलिस ने शुक्रवार को डूंडा पुल से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अखिलेश मिश्रा ने हत्या की वजह बताई कि पत्नी पर उसे चरित्र को लेकर शक था। उसका आरोप था कि पत्नी उसके ट्रक ड्राइवर होने का फायदा उठाकर कई लोगों से फोन पर बात करती थी और उन्हें घर बुलाती थी।


घटना के सकारात्मक और नकारात्मक पहलू

सकारात्मक:

  • तेजी से कार्रवाई: पुलिस ने वारदात के कुछ ही दिनों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
  • सबूत बरामद: खेत से हत्या में प्रयोग किए गए दोनों बांके बरामद कर लिए गए।

नकारात्मक:

  • पारिवारिक संवाद की कमी: आपसी शक ने एक परिवार को तोड़ दिया।
  • बच्चियों का पता नहीं: बेटियों के गायब होने का अब तक कोई सुराग नहीं।
  • सामाजिक चेतना की कमी: चरित्र पर शक के चलते हत्या जैसे कदम उठाना समाज में गंभीर मुद्दा है।

📌 थाना प्रभारी का बयान

थाना प्रभारी प्रकाश सिंह ने जानकारी दी कि हत्या में शामिल दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले से जुड़ी अन्य कड़ियों की जांच कर रही है, विशेष रूप से बेटियों की गुमशुदगी को लेकर।


🔍 निष्कर्ष

Pilibhit में यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि रिश्तों में संवाद की कमी और शक का ज़हर किस हद तक जानलेवा हो सकता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने न्याय की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन समाज को भी आत्मचिंतन की ज़रूरत है।


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