Mansi Negi

पहाड़ों से उठी ये बेटी बनी असिस्टेंट कोच, जानिए कौन सा जिला बना उनकी नई कर्मभूमि….

📰 Mansi Negi : चमोली की बेटी, जिसने देश का नाम किया रोशन

पौड़ी : उत्तराखंड की कठिन राहें और सीमित संसाधन भी Mansi Negi जैसे हौसलों को नहीं रोक पाईं। चमोली जिले के एक छोटे से गांव मजोठी की यह बेटी आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। Mansi Negi ने अपनी मेहनत, लगन और अदम्य साहस से जो मुकाम हासिल किया है, वह असाधारण है। वर्तमान में वह खेल विभाग पौड़ी में असिस्टेंट कोच के रूप में पद संभालेंगी ।


📚 शुरुआत एक साधारण गांव से

Mansi Negi की शुरुआती पढ़ाई चमोली जिले के एक साधारण स्कूल में हुई। पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी उन्होंने हमेशा खुद को साबित किया। वह बचपन से ही दौड़ में काफी तेज थीं। उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई देहरादून से की और वहीं से एथलेटिक्स की पेशेवर ट्रेनिंग शुरू की।

उनके जीवन का सबसे कठिन समय तब आया जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। लेकिन इस गहरे दुःख को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। Mansi Negi कहती हैं कि यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बना और उन्होंने खुद को पूरी तरह खेल को समर्पित कर दिया।


🏃‍♀️ पहाड़ की पगडंडियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक

Mansi Negi बताती हैं कि पहाड़ की पगडंडियां ही उनकी पहली प्रशिक्षण पाठशाला थीं। रोज़ाना स्कूल जाना, घर के काम करना और पहाड़ी इलाकों में चलना – यही उनकी फिटनेस का हिस्सा बन गया। उन्होंने कभी किसी सुविधाजनक ट्रैक पर अभ्यास नहीं किया, बल्कि पहाड़ की कठिन चढ़ाइयों ने उन्हें मजबूत बनाया।

आज वही Mansi Negi अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने जर्मनी के राइन रूहर FISU विश्व विश्वविद्यालय खेल 2025 में वॉक रेस टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत और उत्तराखंड का नाम रोशन किया।

Mansi Negi

🏅 अब तक की उपलब्धियाँ

Mansi Negi अब तक 17 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 20 किमी वॉक रेस में 1 घंटा 36 मिनट का शानदार प्रदर्शन किया है। उनके शानदार करियर को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार 2022-23 से सम्मानित किया।

Mansi NegI Athlete

🏟️ रांसी स्टेडियम: नई उड़ान की तैयारी

वर्तमान में Mansi Negi को खेल विभाग पौड़ी मे असिस्टेंट कोच की जिम्मेदारी दी गई है। वह हर दिन हाई एल्टीट्यूड रांसी स्टेडियम में अभ्यास करती हैं। उनका मानना है कि यह मैदान खिलाड़ियों के लिए बहुत उपयोगी है। यहां ना सिर्फ उत्तराखंड के, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों के खिलाड़ी भी अभ्यास के लिए आते हैं।

🗣️ Mansi Negi कहती हैं:
“मैं रोज़ाना रांसी स्टेडियम में अभ्यास करती हूं ताकि आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में और बेहतर प्रदर्शन कर सकूं। मैं चाहती हूं कि उत्तराखंड के युवा भी इस मैदान की सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाएं।”


🧑‍🏫 कोच की भूमिका में Mansi Negi

अब जब Mansi Negi खुद कोच के रूप में कार्यरत हैं, तो वह अपने अनुभवों को युवाओं के साथ साझा करती हैं। उन्होंने बताया कि खेल में सफलता केवल शारीरिक मेहनत नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता भी मांगती है। वह रोज़ाना खिलाड़ियों को तकनीकी और मानसिक दोनों तरह की ट्रेनिंग देती हैं।

प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर रावत ने बताया कि रांसी मैदान में वर्तमान में 300 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। उन्होंने कहा:

Mansi Negi ने अपने कठिन परिश्रम और समर्पण से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत का नाम रोशन किया है। उन्हें असिस्टेंट कोच की जिम्मेदारी देकर सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है।”


🧵 परिवार का समर्थन: सबसे बड़ी ताकत

Mansi Negi मानती हैं कि उनकी सफलता में उनकी मां और भाई का अहम योगदान रहा है। कठिन परिस्थितियों में परिवार ने उन्हें सहारा दिया और कभी हार मानने नहीं दी। उन्होंने बताया कि उनके भाई ने हमेशा उन्हें मोटिवेट किया और मां ने हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहीं।


🌟 Mansi Negi: एक नाम, एक प्रेरणा

Mansi Negi की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि पहाड़ जैसी चुनौतियां भी मेहनत और हिम्मत के आगे झुक जाती हैं।


🔚 निष्कर्ष: पहाड़ की बेटी, पूरे भारत की शान

Mansi Negi आज उत्तराखंड की ही नहीं, पूरे भारत की बेटियों के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास हर उस युवा को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, जो सपने देखता है और उन्हें सच करने का हौसला रखता है।

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