धामी मंत्रिमंडल बैठक से आई राहत भरी खबर, अब उपनल कर्मचारियों को मिलेगा बराबरी का वेतन

धामी मंत्रिमंडल बैठक में बड़ा ऐलान, 10 साल पूरे करने वाले उपनल कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ..

धामी मंत्रिमंडल बैठक : उपनल कर्मचारियों को मिला समान कार्य समान वेतन का भरोसा

धामी मंत्रिमंडल बैठक उत्तराखंड के हजारों उपनल कर्मचारियों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उपनल कर्मचारियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दे पर अहम निर्णय लिया गया। बैठक में समान कार्य, समान वेतन के सिद्धांत को स्वीकार करते हुए इसे चरणबद्ध रूप से लागू करने पर सहमति बनी है।

सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड यानी उपनल के करीब सात हजार कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने जा रहा है। लंबे समय से वेतन विसंगति और नौकरी की अनिश्चितता झेल रहे कर्मचारियों के लिए उम्मीद की नई शुरुआत मानी जा रही है।


दस साल की सेवा पूरी करने वालों को पहले लाभ

कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि उपनल के तहत दस वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाएगा। फिलहाल वर्ष 2015 तक नियुक्त कर्मचारियों को शासनादेश जारी होने के बाद तत्काल प्रभाव से वेतन निर्धारण का लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों को विभागीय संविदा में नहीं लिया जाएगा, बल्कि मौजूदा व्यवस्था में ही वेतन समानता लागू की जाएगी।

सरकार का कहना है कि यह फैसला कर्मचारियों के हित और राज्य के वित्तीय संतुलन, दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

धामी मंत्रिमंडल बैठक 15 jan 2026

2016 से 2018 तक के कर्मचारियों के लिए चरणबद्ध योजना

धामी मंत्रिमंडल बैठक में यह भी तय हुआ कि वर्ष 2016, 2017 और 2018 में नियुक्त उपनल कर्मचारियों को तीन चरणों में विभागीय संविदा में लेते हुए समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाएगा। इसके बाद आगे के वर्षों में नियुक्त कर्मचारियों को भी 2032 तक इसी व्यवस्था के तहत शामिल किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस चरणबद्ध प्रक्रिया से राज्य पर एक साथ वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा और सभी कर्मचारियों को न्याय भी मिल सकेगा।


अब उपनल में नियुक्ति का बदला नियम

इस कैबिनेट बैठक का एक और अहम फैसला यह रहा कि अब आगे से उपनल के माध्यम से केवल भूतपूर्व सैनिकों के परिजनों को ही नौकरी दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, इससे उपनल के मूल उद्देश्य को मजबूती मिलेगी और पूर्व सैनिक परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।


कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का बयान

इस फैसले पर जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि उपनल कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने बताया कि वित्तीय संसाधनों को देखते हुए कैबिनेट ने संतुलित फैसला लिया है, ताकि कर्मचारियों को उनका हक भी मिले और राज्य की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित न हो।


हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की पृष्ठभूमि

उपनल कर्मचारियों का यह मामला लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन रहा है। वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से भी सरकार को राहत नहीं मिली और याचिका खारिज कर दी गई।

इसके बाद उपनल कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की, जिससे सरकार पर निर्णय लेने का दबाव और बढ़ गया।


मंत्रिमंडलीय उप समिति की सिफारिशों पर फैसला

कोर्ट के आदेशों और कर्मचारियों के दबाव के बीच सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया था। इस समिति ने सभी पहलुओं पर विचार कर अपनी सिफारिशें दीं। धामी मंत्रिमंडल बैठक में इन्हीं सिफारिशों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया गया, जिसे अब कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।


कर्मचारियों में संतोष, अमल पर नजर

कैबिनेट के फैसले के बाद उपनल कर्मचारियों में संतोष का माहौल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने उनकी बात सुनी है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि असली राहत तब मिलेगी, जब यह फैसला समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतरेगा।


राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से अहम फैसला

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, धामी मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया यह निर्णय सरकार के लिए प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर अहम है। एक ओर इससे हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, तो दूसरी ओर सरकार को कोर्ट के आदेशों के अनुपालन का रास्ता भी मिल गया है।

कुल मिलाकर, उपनल कर्मचारियों को लेकर लिया गया यह फैसला उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

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