Nanda Devi Rajjaat Yatra 2026 Postpone

श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर: नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित , अंतिम फैसला 23 जनवरी को..

Nanda Devi Rajjaat Yatra 2026 स्थगित, अब 2027 में होगा हिमालयी महाकुंभ

Chamoli : उत्तराखंड की सबसे कठिन और आस्था से जुड़ी पैदल धार्मिक यात्राओं में शामिल Nanda Devi Rajjaat Yatra 2026 को फ़िलाल स्थगित कर दिया गया है। अब यह ऐतिहासिक यात्रा वर्ष 2027 में आयोजित हो सकती है । इस निर्णय की जानकारी नंदा देवी राजजात यात्रा समिति से जुड़े पदाधिकारियों ने दी है। श्रद्धालुओं के बीच यह यात्रा “हिमालय का महाकुंभ” के नाम से भी जानी जाती है। यात्रा पर अंतिम फैसला 23 जनवरी को लिया जाएगा।

क्यों स्थगित हुई Nanda Devi Rajjaat Yatra 2026?

कर्णप्रयाग में आयोजित बैठक के बाद राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर और महासचिव भुवन नौटियाल ने स्पष्ट किया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो पाईं। इसके साथ ही मौसम से जुड़ी गंभीर चिंताओं ने भी इस निर्णय को मजबूती दी।

समिति के अनुसार, पंचांग के हिसाब से यदि यात्रा 2026 में होती, तो यह 19 और 20 सितंबर के आसपास उच्च हिमालयी इलाकों में पहुंचती। इस दौरान भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की आशंका रहती है। निर्जन पड़ावों पर आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा प्रबंधों का अधूरा होना भी बड़ा कारण रहा।

23 जनवरी को होगी औपचारिक घोषणा

राजजात समिति ने बताया कि 23 जनवरी को नौटी गांव में मनौती का कार्यक्रम विधिवत रूप से संपन्न किया जाएगा। इसी दिन वर्ष 2027 में यात्रा आयोजित किए जाने की औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। यह पहला अवसर है जब राजजात यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त के अनुरूप विधिवत संकल्प लिया गया है।

महासचिव भुवन नौटियाल के अनुसार, 2026 में यात्रा कराना व्यवस्थागत रूप से जोखिम भरा होता। राजजात यात्रा का इतिहास बताता है कि यह हर बार ठीक 12 वर्षों के अंतराल पर संभव नहीं हो पाई है, और विषम परिस्थितियों में यात्रा कराना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं होता।

हिमालय की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में एक

नंदा देवी राजजात लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा है, जो हर 12 साल में आयोजित होती है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं की जीवंत पहचान मानी जाती है। दुर्गम पहाड़, बर्फीले दर्रे और ऊंचाई पर बसे निर्जन पड़ाव इस यात्रा को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

चार सींग वाला खाडू करता है अगुवाई

इस यात्रा की सबसे अनोखी परंपरा है चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू। मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। यही खाडू पूरी यात्रा का अग्रदूत होता है और इसे मां नंदा देवी का प्रतिनिधि माना जाता है। यात्रा चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड तक जाती है।

प्रशासन पूरी तरह तैयार: जिला प्रशासन

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का दायित्व यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है। फिलहाल समिति की ओर से औपचारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन हर स्थिति के लिए तैयार है। आपदा की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन पहले ही यात्रा की तिथियों को लेकर समिति से पत्राचार कर चुका था।

अंतिम फैसला 23 जनवरी के बाद

हालांकि समिति स्तर पर यात्रा स्थगित करने पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय 23 जनवरी को औपचारिक घोषणा के साथ सामने आएगा। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को अब 2027 में होने वाली Nanda Devi Rajjaat Yatra की तैयारी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।

Nanda Devi Rajjaat Yatra 2026 का स्थगित होना आस्था से जुड़ा कठिन फैसला जरूर है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा, मौसम की चुनौती और अधूरी व्यवस्थाओं को देखते हुए इसे समयानुकूल और जिम्मेदार निर्णय माना जा रहा है। स्थगित, अब 2027 में होगा हिमालयी महाकुंभ

उत्तराखंड की सबसे कठिन और आस्था से जुड़ी पैदल धार्मिक यात्राओं में शामिल Nanda Devi Rajjaat Yatra 2026 को स्थगित कर दिया गया है। अब यह ऐतिहासिक यात्रा वर्ष 2027 में आयोजित की जाएगी। इस निर्णय की जानकारी नंदा देवी राजजात यात्रा समिति से जुड़े पदाधिकारियों ने दी है। श्रद्धालुओं के बीच यह यात्रा “हिमालय का महाकुंभ” के नाम से भी जानी जाती है।

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